Basic, is it??/मूलभूत प्रश्न ??/बुनियादी सवाल??

Original thought: English

 

Basic, is it??

Who are we? Where do we come from? Where are we going?

These are the three basic questions that I always ask myself when in doubt. Doubt can arise a lot of times, especially when you are not in control. When we think we are in control, are we really in control or we think we are… so, is control really an illusion of control? Let’s not go there. Let’s discuss these questions first.

Who are we?

This question can be answered in many different ways. We can describe ourselves with a name or names, occupation, gender, lineage, language, location, community, country and so on and so forth. However, this answer is the answer we give to anyone who asks us to fill a detailed form for getting something or the other, for example, banking services, cooking gas connection, higher education. Is that who we are? Or to say it in better words, does this fully describe us? Let’s say, we add our full psychological profile including our personality type, our intelligence quotient, our emotional quotient and all such data. Would that still be able to fully answer the question? So, we are still searching for an answer.

Where do we come from?

Maybe we could say that we come from a particular country or a particular community or some group we belonged to in college. Some could say they come from a particular philosophy or ideology. These answers remain insufficient though.

We all could agree that we come from our mother’s womb. However, from where do we come from in our mother’s womb? Now, we are not looking for a physiological answer here, because we can keep on asking this question and there would come a point when we won’t have any answer.

Where are we going?

We could choose a location to answer this question or answer it in terms of a particular milestone we want to achieve in life. However, we don’t really know where we might be tomorrow. We plan a lot of things but there is simply no guarantee that whatever we have planned may actually take place. As the age-old saying goes – “Man proposes. God disposes.” Don’t get me wrong. You can say whichever thing you believe in instead of saying God because it won’t change the fact that we have zero clue about where we might end up the next moment. We don’t even know whether we would be alive or not. So, this very important question also remains unanswered.

These questions used to irritate me a lot. They still do even today. They are very basic questions. Nothing fancy about them!!! Really!!! They bothered me. I searched for the answers whenever I was upset. All they showed me is how insignificant I am in the whole scheme of world. It told me to not give too much importance to myself. I would not say I was able to do this. It isn’t easy. But whenever I am able to accept that I am nothing. That is when I realise that I am nature. I come from nature and I am going towards nature.

Of all the thoughts that I think, these calm me the most!

So, these three questions are my lighthouse during the times of crisis!!!

Today, I ask myself: Who am I? Where do I come from? Where am I going?

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मूळ विचार: इंग्रजी

 

मूलभूत प्रश्न ??

मी कोण आहे? मी कुठून आलो? मी कुठे जात आहे?

हे तीन मूलभूत प्रश्न मी साशंक असताना स्वतःला विचारते. शंका अनेकदा उद्भवू शकतात, खासकरून जेव्हा परिस्थिती आपल्या नियंत्रणात नसते तेव्हा. यावरून अजून एक प्रश्न पडतो मला. आपल्याला जेव्हा वाटतं कि गोष्टी आपल्या आवाक्यात आहेत तेव्हा ते खरंच तसं असतं कि तसं आपल्याला वाटतं असतं? म्हणजे नियंत्रण असणं हाही एक भ्रमच असतो का? चला सांप्रत विषय वेगळा आहे. प्रथम या प्रश्नांची चर्चा करूया.

मी कोण आहे?

या प्रश्नाचे उत्तर वेगवेगळ्या प्रकारे दिले जाऊ शकते. आपण स्वतःचे नाव किंवा नावे, व्यवसाय, लिंग, वंश, भाषा, स्थान, समुदाय, देश इत्यादींसह स्वतःचे वर्णन करू शकतो. तथापि, हे उत्तर म्हणजे आपल्याला कोणीतरी काही सुविधा/वस्तू मिळविण्यासाठी सविस्तर फॉर्म भरण्यास सांगितल्यावर द्यायचे उत्तर होय . उदाहरणार्थ, बँकिंग सेवा, स्वयंपाक गॅस कनेक्शन, उच्च शिक्षण, इत्यादी. काय हे पुरेसे आहे हे सांगण्यासाठी कि मी कोण आहे? किंवा अधिक चांगल्या शब्दात सांगायचे तर हे उत्तर आपले पूर्ण वर्णन करते काय? समजा आपण यात आपले अधिकची माहिती म्हणून व्यक्तिमत्व प्रकार, बुद्ध्यांक, भावनांक अशा सर्व संपूर्ण मानसिक चाचण्या जोडल्या तरी त्या ‘मी कोण?’ या प्रश्नाचे पूर्ण उत्तर देण्यास सक्षम असेल काय? तर आपणअद्याप याचे उत्तर शोधत आहोत.

मी कुठून आलो?

याचे उत्तर देताना कदाचित आपण असे म्हणू शकतो की आपण एखाद्या विशिष्ट देशातून किंवा एखाद्या विशिष्ट समुदायाकडून आलो आहोत किंवा एखाद्या गटाकडून ज्याचे महाविद्यालयात असताना आपण सदस्य होतो. काहीजण असे म्हणतील की ते एखाद्या विशिष्ट तत्त्वज्ञान किंवा विचारसरणीतून पुढे आले आहेत. पण ही उत्तरे तशी अपुरीच राहतात.

आपल्या  सर्वांचेच एकमत होईल कि आपण आपल्या आईच्या गर्भातून आलो आहोत. परंतु, आपण आपल्या आईच्या गर्भात कोठून आलो? येथे आपण शरीरशास्त्रानुसार उत्तर नाही आहोत, कारण आपण तिथे कुठून आलो हा प्रश्न विचारत राहू शकतो आणि एक वेळ अशी येते जेव्हा आपण निरुत्तर होतो.

मी कुठे जात आहे?

या प्रश्नाचे उत्तर देण्यासाठी आपण एखाद्या ठिकाणाचे किंवा आयुष्यातील एखाद्या टप्प्याचे नाव घेऊ शकतो. परंतु कोणाला ठाऊक असतं कि आपण उद्या कुठे असू? आपण बर्‍याच योजना आखत असतो परंतु त्या प्रत्यक्षात येतील याची शाश्वती नसते. एक लेखिका म्हणते – “नाही कळले रघुनाथांना उद्या काय होणार? राज्याभिषेक कि वनवास?” मला चुकीचे समजू नका. इथे कोणत्याही मोठ्या पदावरील व्यक्तीचा अनुभव आपण घेऊ शकता. कोणाचेही उदाहरण घेतले तरी हे सत्य बदलत नाही कि पुढच्या क्षणी आपण कोठे असू हे आपण ठामपणे सांगू शकत नाही. कुठे जाणे सोडाच आपण जिवंत राहू की नाही हे देखील आपल्याला माहित नसते. तर अशाप्रकारे हा प्रश्नही अनुत्तरीत राहतो.

हे प्रश्न मला खूप छळायचे आणि ते आजही छळतात. हे प्रश्न अतिशय मूलभूत आहेत. फार गुंतागुंतीचे असे त्यात काही नाही!!! खरोखरंच !!! त्यांनी मला फार त्रास दिला. जेव्हा जेव्हा मी अस्वस्थ होते तेव्हा मी यांची उत्तरे शोधत राहिले. या शोधाने मला दाखवून दिले कि संपूर्ण जगाच्या तुलनेत मी किती तुच्छ आहे. त्यांनी मला जाणीव करून दिली कि मी स्वतःला फार महत्वाचे समजणे योग्य नव्हे. मी काही केले किंवा माझ्यामुळे काही झाले हे म्हणणे फार बालिशपणाचे ठरते. पण हे करणे सोपे नाही. पण जेव्हा मी हे स्वीकारण्यास सक्षम असते कि मी काहीच नाही तेव्हाच मला जाणवतं कि मी निसर्ग आहे. मी निसर्गातून आले आहे आणि मी निसर्गाकडे जात आहे.

माझ्या मनात उमटणाऱ्या सगळ्या विचारांपैकी यांनी मला सर्वात जास्त शांत केले!

तर संकटाच्या काळात हे तीन प्रश्न जणू माझे दीपस्तंभच आहेत !!!

आज मी स्वतःला विचारते: मी कोण आहे? मी कुठून आले आहे? मी कोठे जात आहे?

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मूल विचार: अंग्रेजी

 

बुनियादी सवाल??

हम कौन है? हम कहां से आते हैं? हम कहा जा रहे है?

ये तीन बुनियादी प्रश्न हैं जो मैं हमेशा संदेह में होने पर खुद से पूछती हूँ। संदेह कई बार पैदा हो सकता है, खासकर जब स्थिति आपके नियंत्रण में नहीं हैं। जब हम सोचते हैं कि हम नियंत्रण में हैं, तो क्या हम वास्तव में नियंत्रण में हैं या हमें लगता है कि हम नियंत्रण में हैं … इसलिए, क्या नियंत्रण वास्तव में हैं या सिर्फ उसका भ्रम है? चलो ये चर्चा अभी के लिए नहीं है। आइए पहले इन सवालों पर चर्चा करें।

हम कौन है?

इस सवाल का जवाब कई अलग-अलग तरीकों से दिया जा सकता है। हम खुद को एक नाम या अनेक नामों, व्यवसाय, लिंग, वंश, भाषा, स्थान, समुदाय, देश आदि के साथ वर्णन कर सकते हैं। हालांकि, यह उत्तर वह है जो हम उसको देते हैं जो हमें कुछ पाने के लिए एक फॉर्म विस्तृत रूप से भरने के लिए कहता है, उदाहरण के लिए, बैंकिंग सेवाएं, रसोई गैस कनेक्शन, उच्च शिक्षा। क्या वह हम हैं? या इसे बेहतर शब्दों में कहें, तो क्या यह पूरी तरह से हमारा वर्णन कर पाता है? अगर हम इसमें अपने व्यक्तित्व के प्रकार, बुद्धि का अंक,अपनी भावनात्मकता का अंक और ऐसी सब मनोवैज्ञानिक जानकारी को जोड़ते हैं तब भी क्या इस सवाल का जवाब पूरी तरह से दे पाएंगे ? तो बस अभी भी इस प्रश्न के उत्तर की तलाश जारी हैं।

हम कहां से आते हैं?

शायद हम कह सकते हैं कि हम एक विशेष देश या समुदाय या उच्च शिक्षा प्राप्त करते हुए सदस्यता लिया हुए किसी समूह से आते हैं। कुछ लोग कह सकते हैं कि वे एक विशेष दर्शन या विचारधारा से आते हैं। हालांकि ये जवाब अपर्याप्त हैं।

हम सभी सहमत हो सकते हैं कि हम अपनी माँ के गर्भ से आते हैं। हालाँकि, हम अपनी माँ के गर्भ में कहाँ से आते हैं? अब, हम यहां एक शारीरिक जवाब की तलाश नहीं कर रहे हैं, क्योंकि हम यही सवाल बार-बार पूछ सकते हैं और हम ऐसे एक पड़ाव तक पहुंच जाएंगे  जब हम कोई जवाब नहीं  दे सकेंगे।

हम कहा जा रहे है?

हम इस प्रश्न का उत्तर देने के लिए कोई एक स्थान चुन सकते हैं या जिंदगी के किसी विशेष पड़ाव के संदर्भ में इसका जवाब दे सकते हैं। हालाँकि, हम वास्तव में नहीं जानते कि हम कल कहाँ होंगे। हम बहुत सी चीजों की योजना बनाते हैं लेकिन इस बात का कोई भरौसा नहीं है कि हमने जो भी योजना बनाई है वह वास्तव में आएगी। जैसा कि एक लेखिका कहती हैं – ” भगवान् राम कहाँ जानते थे, कल क्या होगा? राज्यभिषेक या बनवास?” मुझे गलत मत समझिये,आप ईश्वर के जगह पर जिस व्यक्ति पर आप विश्वास करते हैं उसका अनुभव मान सकते है। क्योंकि यह इस तथ्य को नहीं बदलेगा की हम नहीं जानते की कल हम कहाँ  होंगे। शायद आनेवाला पल हमारे लिए आख़री भी साबित हो सकता हैं। इसलिए यह बहुत महत्वपूर्ण प्रश्न भी अनुत्तरित रहता है।

ये सवाल मुझे बहुत तंग करते थे जैसे वो आज भी करते हैं। वे बहुत सरल और बुनियादी सवाल हैं। इनमे एक तरह से देखा जाए तो जटिल कुछ भी नहीं !!! सचमुच !!! वे मुझे हमेशा सताते थे। जब जब मैं परेशानियों से घिरी हुई होती  तब तब मैं इनके जवाब खोजने लगती। इन्होने मुझे जताया की ब्रह्माण्ड की तुलना में  मैं बहुत ही अतिसामान्य हूँ। मैं धीरे-धीरे समझने लगी की मुझे अपने आप को जरुरत से ज्यादा महत्व नहीं देना चाहिए। मुझे यह नहीं समझना चाहिए की मेरे आसपास घटनेवाली घटनाएँ  मेरी वजह से प्रत्यक्षरूप ले रही हैं। यह आसान नहीं है लेकिन जब भी मैं यह स्वीकार कर पाती हूँ तब मुझे मेरे गौणत्व (छोटा होना) का अनुमान होता हैं। तभी मुझे एहसास होता है कि मैं प्रकृति हूँ । मैं प्रकृति से आती हूँ और मैं प्रकृति की ओर जा रही हूँ।

मुझे लगता है कि सभी विचारों में से, इन सबसे मुझे शांत किया!

संकट के समय ये तीन प्रश्न मेरे प्रकाशस्तंभ हैं !!!

आज मैं खुद से पूछती हूँ: मैं कौन हूँ? मैं कहाँ से आयी  हूँ? मैं कहाँ जा रही हूँ?

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