The gift/भेट/भेटवस्तू

Original Thought: English

The gift

Recently, I cleared some of the things from my cupboard. Every time I clean my cupboard, I almost lose myself into the memories. That is what makes cleaning a very time-consuming job. Also, every time I clean, I find something new in all that is so old.
This time, it was a purse. It was a gift that I had received from my friends at junior college in 2008. For a teenager, gifts given by friends become things that you love the most. Later on, memories start replacing things. This purse had a lot of glitter on it when it was new. When I touched this purse, I realised that the glitter was coming off. I gently washed the purse and most of the glitter came off. The purse was still very nice. However, it had become dull and stained. Nobody would look at the purse and appreciate it. I was almost feeling sorry for the purse.
Suddenly, I realised that there was no reason to be sorry at all. Because now the purse would be known for how strong it is, how it holds so many things, how it has stayed strong through all these years.
This felt a lot like growing up. There may be many things the person may have to endure during the process of growing up. They may leave scars. As a child grows up, the outer beauty is washed away by time, what remains is the real person.
The real purse stayed with me. I will keep it safely so that it stays long. After all, it has taught me something that I value the most.
That’s the best gift!!!

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मूल विचार: अंग्रेजी

भेट
हाल ही में, मैंने अपने अलमारी में से कुछ चीजें निकालकर उनकी साफ-सफाई की। हर बार की तरह, अलमारी को संवारते संवारते मैं अपनी पुरानी यादों में खो गई। यही कारण है की साफ सफाई करने में मुझे बहुत समय लगता है। और हर वक्त जब मैं सफाई करती हूं, तो इन सारी पुरानी चीजों में मैं कुछ नया पा लेती हूं।
इस बार मुझे एक पर्स या फिर थैली मिली। यह पर्स मुझे भेट की तौर पर मेरे दोस्तों से 12वीं कक्षा में करीबन 2008 के वर्ष में मिली थी। उस कच्ची उम्र में दोस्तों से मिले हुए तोहफे दिल के कुछ ज्यादा ही करीब होते हैं। बाद में यादें चीजों की जगह लेना शुरू कर देती है। जब यह पर्स नई थी, तब वह बहुत चमकती थी। आज जब मैंने इस पर्स को छुआ तो एहसास हुआ की उस पर लगी हुई चमकीली परत निकल रही है। मैंने उसे हलकेसे धोया तो सारी चमक निकल गयी। पर्स तो अभी-भी बहुत अच्छी दिखती है। लेकिन अब वह कुछ साधारण-सी और दाग धब्बों से सनी हुई है। कोई भी उसे देख उसकी सराहना नहीं करेगा। मुझे पर्स के लिए बुरा लग रहा था।
अचानक से मुझे एहसास हुआ की बुरा लगने का कोई कारण ही नहीं था। क्योंकि अब वह पर्स अपनी मजबूती के लिए, चीजें रखने के अपने काम के लिए, इतने साल टिके रहने के उसके अंदाज के लिए जानी जाएगी।
ऐसे लगा कि जैसे कोई बढ़ रहा हो। बढ़ते समय एक इंसान को हर तरह की अलग-अलग परिस्थितियों में से गुजारना पड़ता है। वे अपने निशान छोड़ जाती है। जैसे-जैसे एक बच्चा बढ़ता है, तो बाहरी सुंदरता धीरे-धीरे धीरे धूल जाती है, जो कुछ रहता है वह हैं अस्सल इंसान।
वैसे ही असली पर्स मेरे पास रह गई। मैं उसे अच्छे से रखूंगी कि वह ज्यादा दिन चले। आखिरकार उसने मुझे ऐसी सीख दी है जो मेरे दिल के बहुत करीब है।
सच में, इससे अच्छा तोहफा क्या हो सकता है?

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मूळ विचार: इंग्रजी

भेटवस्तू
हल्लीच मी माझं कपाट आवरलं. प्रत्येक वेळी कपाट आवरताना मी आठवणींमध्ये हरवून जाते. त्याच मुळे कपाट आवरणं हा अत्यंत वेळ काढू उद्योग होतो. प्रत्येक वेळी साफसफाई करताना ह्या सगळ्या जुन्या वस्तूंमध्ये मला काहीतरी नवीन सापडतं.
यावेळी मला एक पर्स किंवा पिशवी सापडली. मी कनिष्ठ महाविद्यालयात म्हणजे बारावीला असताना साधारण 2008 साली माझ्या मैत्रिणींकडून मला ती भेट म्हणून मिळाली होती. त्या अर्धवट वयात मित्रमैत्रिणींकडून मिळालेल्या भेटवस्तूंचं जरा जास्तच अप्रूप असतं. नंतर वस्तूंची जागा आठवणी घेतात. ही पर्स जेव्हा नवीन होती तेव्हा तिच्यावर फार चमकी होती. पण आत्ता तिला हात लावल्यावर असं जाणवलं किती चमकी निघून जातीय. मी हलकेच ती पर्स धूतली तर सगळीच चमकी निघून गेली. पर्स अजूनही छानच होती. पण आता ती मळकट आणि डागाळलेली दिसत होती. आता कोणीही तिच्याकडे बघून तिचं कौतुक केलं नसतं. मला त्या पर्स च फार वाईट वाटू लागलं.
अचानक माझ्या लक्षात आलं की वाईट वाटण्याचे मुळी काही कारणच नव्हतं. कारण आता ती पर्स तिच्या मजबुतीसाठी, टिकाऊपणासाठी आणि विविध वस्तू सामावून घेण्याच्या तिच्या कामासाठी ओळखली जाणार होती.
हे मला मोठं होण्यासारखं वाटलं. मोठं होण्याच्या प्रक्रियेत एक माणूस अनेक प्रकारच्या गोष्टींना सामोरा जात असतो. त्या आपल्या मागे व्रण ठेवून जातात. जसजसं मूल मोठं होतं तसतशी बाहेरील सुंदरतेची आवरणं धुवून जातात आणि जो राहतो तो असतो खरा माणूस!
अशीच खरी पर्स माझ्याकडे राहिली. मी तिला नीट ठेवेन, जेणेकरून ती खूप दिवस राहील. शेवटी, तिने मला असा एक धडा शिकवलाय की ज्याने माझं मन उजळून गेलंय.
यापेक्षा चांगली भेटवस्तू काय असू शकते?

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