Distance/दूरी/अंतर

Original thought: English

 

Distance

People say, ‘with a little bit of distance, you get perspective!’ They also say, ‘distance makes heart grow fonder’. Funnily enough these proverbs are used in across the country in many Indian languages. So, across culture, people agree that importance of distance of some distance. I have grown up hearing these things said many times.

When I visit exhibitions where artists have created and displayed installations or structures, this ‘distance’ has an amazing role to play. Recently, Kala Ghoda Festival took place in Mumbai. There, they always have different structures showcased as per the theme. There was an exhibit made of bangles. One of the volunteers near this bangles exhibit was yelling, “you would have to maintain the distance. Otherwise, you would not be able to see the lady!!! See that tape there… That’s where you need to stand”! I didn’t understand what she meant to say initially. However, later, I realised that the bangles were arranged in such a way that one could see the face of a lady from a particular distance. The bangles by themselves do not make anything. However, with the help of an artists’ vision and some much-needed distance, they can show you the face of a lady who loves to wear them.

The examples of distance helps are numerous. However, it is vital that we use the distance properly. Like with the bangles exhibit, with too much distance or too less of if, one cannot see the lady. Similarly, if we want to use distance to get some perspective, we need to be careful about the amount of distance.

 

It is like Queen Elsa says in the movie Frozen.

It’s funny how some distance, makes everything seem small.

The fears that once controlled me, can’t get to me at all.

 

Remember though it is SOME distance.

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मूल विचार: अंग्रेजी

 

दूरी

लोग कहते हैं, ‘थोड़ी दूरी के साथ, आप  एक नया नजरिया प्राप्त कर सकते हैं।’ वे यह भी कहते हैं, ‘दूरी प्रेम बढ़ाती है’। देश भर में इन कहावतों का उपयोग कई भारतीय भाषाओं में किया जाता है। तो, अलग अलग संस्कृति होने पर भी लोग सहमत हैं कि कुछ दूरी जरुरी होती है। मैं ये कहावतें सुनकर ही बड़ी हुई हूँ।

जब मैं कलाकारों ने बनाई विविध संरचनाओं की प्रदर्शनी देखने जाती हूँ, तो यही ‘दूरी’ बहुत ही अद्भुत भूमिका निभाती नजर आती है। हाल ही में मुंबई में काला घोडा महोत्सव का आयोजन हुआ था। वहां, हर वर्ष के संकल्पना के अनुसार हमेशा अलग-अलग संरचनाएं होती हैं। उसमें एक संरचना चूड़ियों की भी थी। इस चूड़ियों कि संरचना के पास खड़ी हुई स्वयंसेविका चिल्ला रही थी, “आपको दूरी बनाए रखनी होगी। अन्यथा, आप महिला को नहीं देखपाएंगे!!! वहाँ देखिए एक निशान बना हुआ हैं… आपको वहाँ खड़े होने की जरूरत है “! शुरुआत में मुझे समझ में नहीं आया कि वह क्या कहना चाहती थी। हालांकि, बाद में, मुझे एहसास हुआ कि चूड़ियों की संरचना इस तरह से की गई थी कि कोई व्यक्ति एक विशेष दूरी से एक महिला का चेहरा देख सके। चुडिया खुदसे तो कोई आकर नहीं बनाती हैं। हालांकि, एक कलाकार की दृष्टि और कुछ आवश्यक दूरी की मदद से, वे आपको एक महिला का चेहरा दिखा सकते हैं। ऐसी महिला जिसे चूड़ियां पहनना पसंद हो।

दूरी हमें किस तरह से मदद करती हैं उसके तो कई सारे उदाहरण हैं। हालांकि, यह महत्वपूर्ण है कि हम दूरी का सही ढंग से उपयोग करें। चूड़ियों की संरचना की तरह, बहुत अधिक या बहुत कम दूरी के साथ, कोई महिला का चेहरा नहीं देख सकता है। उसी तरह, अगर हम कुछ अलग नजरिया प्राप्त करने के लिए दूरी का उपयोग करना चाहते हैं, तो हमें दूरी की मात्रा के बारे में सावधान रहना होगा।

यह बिलकुल वैसा हैं जैसे रानी एल्सा फ्रोजन नाम के चलचित्र में कहती है।

थोडीसी दूरी से सबकुछ छोटा (आसान) लगने लगना, ये एक अजीब एहसास हैं।

जो डर मुझे अबतक बाँधे हुए था, अब मुझतक नहीं पहुँच सकता।

हालांकि यह याद रखना जरुरी हैं कि दूरी थोड़ी ही हो।

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मूळ विचार: इंग्रजी

 

अंतर

लोक म्हणतात, ‘थोडं दूर गेलं कि तुम्हाला नवीन दृष्टीकोन गवसतो!’ ते असेही म्हणतात की, ‘विरहाने प्रेम वाढते’. बऱ्याच भारतीय भाषांमध्ये देशभर अशा म्हणी वापरल्या जातात हि खरंच एक मजेदार गोष्टंच म्हणायला हवी. संस्कृती वेगळाली असली तरी अंतराचं महत्त्व सगळेच मान्य करतात. मी अशाच म्हणी ऐकत लहानाची मोठी झाले.

जेव्हा मी कलाकारांनी बनवलेल्या विविध संरचनांच्या प्रदर्शनांना भेट देते, तेव्हा हे ‘अंतर’ खुप महत्वाची भूमिका पार पाडतं. अलीकडे मुंबईत काळा घोडा महोत्सव पार पडला. तेथे दरवर्षीच्या संकल्पनेप्रमाणे नेहमीच विविध स्वरुपाच्या संरचना असतात. तिथे एक बांगड्यांची रचना होती. या रचनेच्या जवळची एक स्वयंसेवक ओरडून सांगत होती, “तुम्हाला अंतर ठेवावं लागेल. नाहीतर, तुम्हाला ती बाई दिसणार नाही!!! तिथे खुणेची टेप लावलीय पहा … तुम्हाला तिथे उभं राहावं लागेल! सुरुवातीला तिला काय म्हणायचे आहे ते मला समजले नाही. तथापि, नंतर मला जाणीव झाली की बांगड्या अशा पद्धतीने आयोजित केल्या गेल्या होत्या की एखाद्या विशिष्ट अंतरावरून एका बाईचा चेहरा दिसेल. बांगड्या स्वतः काहीही आकार घडवू शकत नाहीत. परंतु, एका कलाकाराची दृष्टी आणि थोड्याशा अत्यावश्यक अंतराच्या साह्याने आपल्याला त्या स्त्रीचा चेहरा दाखवू शकतात जिला बांगड्या घालायला आवडतात.

अंतर आपल्या कसं उपयोगी पडतं याची उदाहरणं असंख्य आहेत. पण हे ‘अंतर’ आपण योग्यरित्या वापरणे महत्त्वाचे आहे. बांगड्या प्रदर्शनाप्रमाणेच, खूप जास्त किंवा खूप कमी अंतर असल्यास, ती बाई दिसणार नाही. त्याचप्रमाणे जर आपल्याला काही दृष्टीकोन मिळविण्यासाठी अंतराचा उपयोग करायचा असेल तर आपल्याला नक्की किती अंतर आवश्यक आहे याबद्दल सावधगिरी बाळगण्याची गरज आहे.

‘फ्रोजन’ चित्रपटात राणी एल्सा असे म्हणते.

केवळ थोड्याशा अंतरावरून सगळेच लहान (सोपे) भासू लागणे हे खरंच मजेदार आहे.

ज्या भीतीने मला एकेकाळी आपल्या तालावर नाचवले ती भीती आता मला गाठू शकत नाही.

पण आपण हे लक्षात ठेवायला हवे कि अंतर थोडेसेच हवे!!!

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