On occasion of Holika Dahan/होलिका दहनाच्या निमित्ताने/होलिका दहन के अवसर पर

holika dahan

Original thought: English

 

On occasion of Holika Dahan

Today and tomorrow, we would celebrate holika dahan (symbolic burning of the evil demon named holika).

The story behind today’s festival is something like this:

A devoted child is born to a demon. The demon tries his best to make the child forget about all his good ways. He fails time and again. In a last attempt to finish the good, he asks his sister demon holika burn the child. Holika, the demon, has a boon that she cannot be burnt by the fire. So, she takes the child in the fire along with her. Contrary to the boon, holika gets burnt and the child is saved. Eventually, the child is able to end the life of his demon father and restore harmony.

So, today, people in the community gather together and create a big bonfire. They are allowed to express their negativity. Then, during the night sometime the fire quiets down. The next day morning, all that remains is pure like the devoted child. Today, we throw away all our negativity in the burning fire and start living a new life from the next day.

The next day is called Dhooliwandan (translated as bowing in front of the dust and ashes). As the name suggests, we bow down in front of the ashes that remain. They are pure and positive.

On the occasion of holika dahan, I pray that all the negativity in me may be burnt and may tomorrow I wake up with more and more positivity and purity.

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मूळ विचार: इंग्रजी

 

होलिका दहनाच्या निमित्ताने

आज आणि उद्या आपण होलिका दहन (होलीका नावाच्या दुष्ट राक्षसीचे प्रतीकात्मक दहन) साजरे करू.

ह्या सणाची कथा पुढीलप्रमाणे आहे:

एका राक्षसाच्या पोटी एक भक्त जन्माला येतो. तो राक्षस त्या भक्ताने आपली भक्ती विसरावी म्हणून सगळे प्रयत्न करतो. तो पुन्हा पुन्हा अयशस्वी ठरतो. शेवटचा प्रयत्न म्हणून तो आपल्या बहिणीला, होलिकेला, त्या आपल्या मुलाला मारून टाकण्याची आज्ञा करतो. होलिका राक्षसीला अग्निमध्ये न जाळण्याचा वर मिळालेला असतो. म्हणून ती त्या भक्त मुलासोबत आगीमध्ये प्रवेश करते. परंतु वरदान खोटे ठरवत होलिका जळून जाते आणि त्या भक्ताचा जीव वाचतो. पुढे जाऊन तो भक्त आपल्या राक्षस वडिलांचाही विनाश करतो आणि सर्वत्र शांती प्रस्थापित करतो.

आजच्या दिवशी सगळे लोक एकत्र येऊन होळी पेटवतात. आज त्यांना होळीसमोर त्यांची नकारात्मकता व्यक्त करण्याची परवानगी असते. रात्री कधीतरी होळी जाळून आग शांत होते. दुसऱ्या दिवशी सकाळी, जे काही राहते ते त्या भक्तासारखेच पवित्र असते. आज होळीत आपल्यातील सर्व नकारात्मकता जाळत आम्ही उद्यापासून पुन्हा नव्याने जीवन जगायला लागतो.

दुसऱ्या दिवशी धूलिवंदन (धूळ व राखेला नमस्कार करणे). नावाप्रमाणेच, होळी जळल्यानंतर उरलेल्या शुद्ध आणि सकारात्मक राखेसमोर आम्ही दुसऱ्या दिवशी नतमस्तक होतो.

आज होलिका दहनाच्या निमित्ताने मी प्रार्थना करते कि माझ्यातील सर्व नकारात्मकता जाळून जावो आणि उद्याच्या सूर्याबरोबर माझ्यामधेही साकारत्मकतेचा आणि शुद्धतेचा उदय होवो.

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मूल विचार: अंग्रेजी

 

होलिका दहन के अवसर पर

आज और कल हम होलिका दहन (होलिका नाम के बुरी असुर का प्रतीकात्मक दहन) मनाएंगे।

आज के त्योहार के पीछे की कहानी कुछ ऐसी है:

एक भक्त बच्चा एक दानव के घर में पैदा होता है। दानव अपनी पूरी कोशिश करता है कि वह बच्चा अपने सभी अच्छे तरीकों को भूल जाए। वह बार-बार उसके प्रयास में विफल होता है। आखिरी प्रयास के तौर पर वह अपनी बहन दानव होलिका को अपने बच्चे को जला देने के लिए कहता हैं। दानव होलिका आग से न जलने का वरदान प्राप्त हैं, इसिलए वह बच्चे के साथ आग में प्रवेश करती हैं। परन्तु वरदान के विपरीत घटित होता हैं। होलिका जल जाती हैं और भक्त बच्चा बचाया जाता हैं। आगे चलकर बच्चा अपने दानव पिता के जीवन को खत्म कर सभी और शांति प्रस्थापित करता हैं।

आज सब लोग इकट्ठा होते हैं और एक बड़ी सी आग जलाते हैं जिसे होली कहते हैं। आज सभीको अपने अंदर की नकारात्मकता बोलके निकल देने की अनुमति होती हैं।  फिर बीच रात में यह होली की अग्नि शांत हो जाती हैं। अगले दिन सुबह, जो कुछ भी बचता है वह उस भक्त बच्चे की तरह शुद्ध होता है। आज, हम आग में हमारी सभी नकारात्मकता को फेंकते हैं और अगले दिन से एक नया जीवन जीना शुरू करते हैं।

अगले दिन को धूलिवंदन (धूल और राख के सामने सर झुकाकर आशीर्वाद लेना) कहा जाता है। इसके नाम के मुताबिक हम होली के जलने के बाद बची हुई राख और धूल के सामने सिर झुकाकर उसे अपने माथे पे लगाते हैं।

होलिका दहन के अवसर पर, मैं प्रार्थना करती हूँ कि मेरे में जो सभी नकारात्मकता हैं, वो जल जाए और कल का सवेरा मुझे और भी सकारात्मक और शुद्ध बनाए।

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