The beloved of the blue/नीले रंग की प्यारी/निळ्या रंगाची प्रिया

Original thought: English

The beloved of the blue

Amidst the blue
Lies the beloved of the blue
Dynamic yet stable
Source of life
Power to summon death
She holds the colours
Making life beautiful
She becomes the shape and the space within
Stopping and quitting
She knows not
Talk about waiting
She has practised a lot
As I write to her
professing my devotion
I sense within
The warmth of her motherly affection

Among the so many things that shape who we are, the Earth has to be the first, it’s work starting possibly before we are even born. It’s in earth that life sprouts and it’s with her that it grows. The earth is a silent part of our lives.
That is one of the reasons I find any activity related to the earth most endearing. These activities would give you everything that you need to live and hope.
When I put my hands into the soil for planting a sapling, I feel alive. First, you take the sapling and adore it for being green. Then, you look at the ever nurturing sand. Then, you start making space in the sand for the sapling. The sand allows itself to be moved and let’s us create this space. Then, we put the sapling in that space and ensure that the roots are covered by the sand. Our work is not over but just begun. We have just initiated a process of growth and learning. In the days to come the sapling and the sand together with the surroundings would create and sustain life.

If we are able to care for the sapling and let it grow, I t grows and creates opportunities for many more to grow. Once the cycle of careful care is initiated, there is no end. Just imagine how much caring for a single plant can give you. I have not found any work with such bountiful returns.

Then, there is shaping the earth so that it can hold anything and everything that we want. Yes, I am talking about pottery. Now, this is not only something that helps make life smooth but it is also something that is an abode of creativity. From a simple cup to hold our tea to a percussion instrument everything can be made out of clay. On a simple round wheel, a heap of wet clay starts taking shape. Hands and mind of a potter shape the clay. From there the designed clay goes into a furnace to strengthen itself so that the design is maintained. Clay suffers getting burnt like that so that the purpose of the design is served.

I have had a chance to shape the clay a couple of times on the wheel and have made everything that I could imagine with clay. The feel of the clay in my hands is something that I would not forget. It is the most exciting and calming activity.

Please share your experience with clay with me. If you haven’t tried yet, do try it the next time you have some time to spare.

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मूल विचार: अंग्रेजी

नीले रंग की प्यारी
नील गगन और सागर के बीच
उस नीलिमा की प्यारी
हर पल बदलती तथा स्थिर
जीवन का स्रोत
मृत्यु को बुलाने की शक्ति रखनेवाली
वह रंग समेटे है
जीवन को सुंदर बनाती है
वह आकार भी है और भीतर की जगह भी
रोकना और हार मानना
उसे नहीं मालूम
प्रतीक्षा करना
इसमें उसे महारत हासिल है
जब मैं उसे लिखती हूँ
अपनी भक्ति का खुलासा करते हुए
मैं भीतर महसूस करती हूँ
उसकी मातृत्व का स्नेह
इतनी सारी चीजें जो हमें बनाती हैं, पृथ्वी का स्थान पहला होना चाहिए। इसका काम संभवतः हमारे जन्म से पहले ही शुरू होता है। पृथ्वी में है जीवन अंकुरित होकर बढ़ता है। पृथ्वी हमारे जीवन का एक मूक हिस्सा है।
यही कारण है कि मैं पृथ्वी से संबंधित कोई भी गतिविधि मुझे सबसे ज्यादा पसंद है। ये गतिविधियां आपको वह सब कुछ देती है जो आपको जीने और आशा करने के लिए आवश्यक है।
जब मैं अपने हाथों से मिट्टी में पौधे लगाती हूँ, तो मुझे जिंदा होने का एहसास होता है। सबसे पहले, आप पौधों को लेते हैं और इसकी हरियाली को निहारते लिए हैं। फिर आप हमेशा पोषण देने वाली धरती को देखते हैं। फिर आप पौधे के लिए मिट्टी में जगह बनाना शुरू करते हैं। मिट्टी अपने आप को ढालने की अनुमति देती है और हम पौधे के लिए जगह बनाते हैं। फिर, हम उस स्थान पर पौधे लगाते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि उसकी जड़ें मिट्टी से ढंकी हैं। हमारा काम अभी खत्म नहीं बल्कि शुरू हुआ है। हमने अभी विकास और सीखने की प्रक्रिया शुरू की है। पौधा और मिट्टी साथ मिलकर आने वाले दिनों में आस-पास के तत्वों के साथ जीवन को बनाएंगे और बढाएंगे।
अगर हम पौधे की देखभाल करें और उसे बढ़ने दे तो यह खुद बढ़कर है कई औरो को बढ़ने के लिए अवसर पैदा करेगा। यह देखभाल का चक्र शुरू होने के बाद, इसका कोई अंत नहीं है। जरा सोचो, एक अकेले पौधे की देखभाल करना आपको क्या दे जा सकता हैं। मुझे तो इससे ज्यादा फायदा करवाने वाला दूसरा काम नहीं पता।
फिर एक ऐसा काम है जिसमें मिट्टी को मनचाहे रूप में ढाला जाता है ताकि उसमें कुछ भी रखा जा सके। हां, मैं मिट्टी के बर्तनों के बारे में बात कर रही हूँ। अब, यह न केवल एक सुविधा है किन्तु इसमें रचनात्मकता का निवास है। एक सरल चाय की प्याली हो या मिट्टी से बनाया तालवाद्य तबला, सब कुछ मिट्टी से बनाया जा सकता है। एक सरल सी चक्की पर, गीली मिट्टी का एक ढेर आकार लेना शुरू कर देता है। एक कुम्हार के हाथों और दिमाग से मिट्टी आकार लेती है। वहां से मिट्टी भट्ठी में खुद को मजबूत करने के लिए जाती है ताकि डिजाइन या आकार को बनाए रखा जा सके। मिट्टी उस जलन की वेदनाओं को सहन करती हैं ताकि डिजाइन का उद्देश्य सफल हो।
मुझे चक्की पर कुछ समय के लिए मिट्टी को आकार देने का मौका मिला है और बचपन में तो मैंने मिट्टी लेकर अपनी कल्पना से सब कुछ बना दिया है। मेरे हाथों पर जो मिट्टी के स्पर्श का एहसास है वह मैं कभी नहीं भूलूंगी। यह सबसे रोमांचक और शांतीदायी गतिविधि है
कृपया मेरे साथ आप को हुई मिट्टी के स्पर्श की अनुभूति जरूर बाँटें। अगर आपने अभी तक अनुभव नहीं कीया है, तो अगली बार समय मिलते ही कोशिश कर लें।

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मूळ विचार: इंग्रजी

निळ्या रंगाची प्रिया
निळ्या आकाश व सागराच्या दरम्यान
निळ्याची प्रिया राहते
सतत बदलणारी पण स्थिर
जीवनाचा स्रोत
मृत्यूला बोलावून घेण्याची शक्ती बाळगणारी
तिने रंग जपले आहेत
जीवन सुंदर बनविण्यासाठी
ती आकार आणि तीच पोकळी
थांबणे आणि हार मानणे
तिला माहित नाही
वाट पाहणे
यात ती तरबेज आहे
मी तिला सांगते
माझ्या तिच्यावरील भक्तीबाबत
मला अंतरात जाणवते
तिच्या आईच्या प्रेमाची कळकळ

ज्या अनेक गोष्टी आपल्याला घडवतात त्यापैकी महत्त्वाचं आणि प्राथमिक स्थान पृथ्वीला द्यावे लागेल. तिचे काम तर आपण जन्माला येण्याअगोदरच सुरू होते. पृथ्वीवर जीवसृष्टी जन्म घेते आणि वाढतेही. पृथ्वी आपल्या जीवनाचा एक मूक भाग आहे.
म्हणूनच कदाचित मातीशी निगडीत सगळी कामं मला फार भावतात. या कामांमधून तुम्हाला जगण्यासाठी आवश्यक असलेल्या सर्व गोष्टी आणि आशावाद मिळतो.
जेव्हा मी एक रोपटे लावण्यासाठी मातीत हात घालते तेव्हा मला जिवंतपणा जाणवतो. प्रथम आपण रोप हातात घेऊन त्याचं हिरवं गार रूप न्याहाळतो. मग, आपण कायम संगोपनात मग्न माती पाहतो. मग, आपण रोपटे लावण्यासाठी जमिनीत जागा करतो. मातीही तिला इकडून तिकडे हलविण्यास खळखळ करत नाही. मग तयार केलेल्या जागेत रोप लावून आपण ही काळजी घेतो की त्या रोपाची मुळं मातीखाली सुरक्षित आहेत. इथे आपले काम संपत नाही तर इथून आपले काम सुरु होते. आपण विकास आणि शिक्षणाची प्रक्रिया सुरू केलेली असते. त्यानंतर येणार्या दिवसांत रोप आणि माती आसपासच्या वातावरणासोबत मिळून नवीन जीवन घडवतात आणि वाढवतात.
जर आपण एका रोपट्याची काळजी घेऊन त्याला वाढवले तर पुढे रोपे वाढण्यासाठी अनेक संधी निर्माण होतात. काळजी घेण्याचे हे चक्र सुरू झाल्यानंतर थांबतंच नाही. विचार करा की एका रोपाची काळजी घेणं तुम्हाला काय देऊन जाऊ शकतं. मला इतकं फायदेशीर दुसरं काम ठाऊक नाही.
मग, मातीला आकार देण्याच्या कामाबद्दल बोलूया जेणेकरून ती काहीही साठवू शकते. होय मी माती पासून भांडी बनवण्याविषयीच बोलत आहे. हे केवळ एक साधिका नसून त्यामध्ये कुंभाराच्या सृजनशीलतेचा ही समावेश आहे. एका साध्या चहाच्या कपापासुन मातीपासून बनवलेलं तालवाद्य तबला पर्यंत सारं काही माती पासून बनवले जाऊ शकते. एका साध्या चाकावर मातीचा गोळा आकार घ्यायला सुरुवात करतो. कुंभाराचे हात आणि मन त्याला घडवत असतात. त्यानंतर माती भट्टीचा ताप सहन करते जेणेकरून बनवणाऱ्याचे उद्दिष्ट साध्य होईल.
मला एकूण दोन वेळा चाकावर मातीला आकार देण्याची संधी मिळाली आहे. माझ्या हाताला झालेल्या मातीचा स्पर्श मी कधीच विसरणार नाही. हा अनुभव एकाच वेळी रोमांचकारी आणि शांतीदायी असतो.

आपण आपल्याला आलेला माती विषयीचा अनुभव माझ्या सोबत शेअर करू शकता आणि असा अनुभव असून आपण घेतला नसेल, तर वाट कसली बघताय??

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